वार्षिकोत्सव के जरिये बोली,भाषा,संस्कृति से रूबरू कराए का प्रयास

वार्षिकोत्सव के जरिये बोली,भाषा,संस्कृति से रूबरू कराए का प्रयास

दून में दिखेगी सीमांत चमोली – रुद्रप्रयाग की संस्कृति की छटा
देहरादून। बदरी केदार क्षेत्र के देहरादून में निवास कर रहे लोगों को अपनी बोली, भाषा, संस्कृति से रूबरू कराने के उद्देश्य से सीमांत चमोली व रुद्रप्रयाग जिलों के लोगों की प्रतिनिधि संस्था बदरी केदार समिति का ‘ बन्याथ’ नाम से वार्षिकोत्सव रविवार 25 दिसंबर को डिफेंस कॉलोनी के कम्युनिटी सेंटर में होगा। इस अवसर पर संस्था की सारगर्भित स्मारिका ” गढ़ नंदिनी” का विमोचन भी किया जायेगा।
बदरी केदार विकास समिति के अध्यक्ष विजय प्रसाद खाली और महासचिव एडवोकेट मुकेश सिंह राणा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि दुर्भाग्य से पहाड़ों से मैदान की और लगातार पलायन बढता जा रहा है, ऐसे में हम लोग अपनी संस्कृति और जड़ों से दूर होते जा रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए हर साल बन्याथ कार्यक्रम का भव्य आयोजन होता आ रहा है लेकिन दो साल कोरोना के वजह कार्यक्रम आयोजित नहीं हो पाया, लेकिन इस वर्ष इस कार्यक्रम का भव्य आयोजन विगत वर्षो की भांति डिफेंस कालोनी के सामुदायिक केंद्र में 25 दिसंबर कल यानि रविवार को होगा।
इस कार्यक्रम में रुद्रप्रयाग और चमोली जिले के देहरादून में रह रहे लोगों को संस्कृति से जोड़ने का के उद्देश्य से अभिनव प्रयास किया जा रहा है। समिति के महासचिव मुकेश सिंह राणा ने कहा कि कार्यक्रम में लोक संस्कृति के क्षेत्र के उभरते कलाकारों को मंच प्रदान किया जाएगा जिससे युवा अपनी पारंपरिक संस्कृति और बोली भाषा को बेहतर तरीके से जान सकेंगे।
श्री खाली ने बताया कि कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि रुद्रप्रयाग विधायक भरत सिंह चौधरी होंगे जबकि विशिष्ट अतिथि हरियाणा में भाजपा उत्तराखंड प्रकोष्ठ के संयोजक ओम प्रकाश भट्ट,
रिटायर एडमिरल ओम प्रकाश सिंह राणा, गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति तथा वर्तमान में गुरु रामराय यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. उदय सिंह रावत, भाजपा युवा मोर्चा के
प्रदेश सह मीडिया प्रभारी नीरज पंत आमंत्रित हैं। इसके अलावा पूर्व अध्यक्ष बार काउंसलिंग आफ उत्तराखंड पृथ्वीराज चौहान,
पूर्व उपाध्यक्ष बार काउंसलि आफ उत्तराखंड राजीव सिंह बिष्ट सहित कई गणमान्य लोग कार्यक्रम में भागीदारी करेंगे। उन्होंने बताया कि उत्तराखंडी साहित्य और संस्कृति से जुड़ी पुस्तकों तथा पर्वतीय क्षेत्रों के पारंपरिक उत्पाद यथा दाल, मोटे अनाज एवं शरबत, जूस, अचार आदि के स्टाल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र होंगे। हर बार की तरह भगवान बदरी केदार के प्रसाद स्वरूप सहभोज का भी आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में विविधता लाने के लिए इस बार विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

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